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बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रति मनुवादी मीड़िया की साजिश का खुलाशा | Bahishkrit Bharat


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बसपा सपा के कार्यकर्ताओं को लड़ाने का प्रयास मायावती पहले भी मनुवादी मीड़िया से कर चुकी हैं आगाह। बहिष्कृत भारत


बहिष्कृत भारत: मुंबई- 9 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के दिन कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी के गुरु रविदास जन्म स्थान मंदिर वाराणसी जाने पर बसपा सुप्रीमो ने इसे नाटकबाजी करार दिया था। उनका कहना था कि,

1.कांग्रेस, भाजपा व अन्य पार्टियाँ यहां उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के चलते सन्त गुरु रविदास जी को कभी भी मान-सम्मान नहीं देती है लेकिन सत्ता से बाहर होने पर फिर ये अपने स्वार्थ में इनके मन्दिरों/स्थलों आदि में जाकर किस्म-किस्म की नाटकबाजी जरूर करती है। इनसे सर्तक रहे।
 2.जबकि यहां बी.एस.पी. ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसने अपनी सरकार के समय में, इनको विभिन्न स्तर पर, पूरा-पूरा मान-सम्मान दिया है। जिसे भी अब विरोधी पार्टियाँ एक-एक करके खत्म करने में लगी है। जो अति निन्दनीय है।
जबकि न्यूज 18 नामक चैनल ने निम्नलिखित अफवाह फैलाया जिसे बाकी मनुवादी प्रिंट मीड़िया ने भी छाप दिया।
इस चैनल ने छापा था कि,

संत रविदास जयंती: मायावती ने सपा को बताया जातिवादी मानसिकता वाली पार्टी

बसपा सुप्रीमो ने कहा है कि बीएसपी के सत्ता में आने पर भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर रखा जाएगा जिसे जातिवादी मानसिकता के तहत ही पिछली सपा सरकार ने बदल दिया है.

सियासी मकसद से एक दूसरे को गले लगाने वाली उत्तर प्रदेश की दो बड़ी सियासी पार्टियों के रास्ते अब अलग हैं. बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) ने 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा लेकिन अब वोट बैंक की तलाश में सबके रास्ते अलग हैं. बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती (Mayawati) ने अब सपा को जातिवादी मानसिकता वाली पार्टी बताया है. संत शिरोमणि रविदासजी की 643वीं जयंती के मौके पर मायावती ने एक बयान जारी करके समाजवादी पार्टी को जातिवादी मानसिकता वाली पार्टी बताया है. मायावती का कहना है कि समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने भदोही जिले का नाम बदल दिया था.

इस तरह से खबर को तोड़ मरोड़ कर फर्जी ढंग से छाप दिया गया। बहुजन समाज का अपना मीडिया नहीं होने का खामियाजा बहुजन समाज के हर स्तर के लोगों को उठाना पड़ रहा है। जबकि बहुजन समाज के राजनेता कभी इस चीज को समझने के लिए तैयार नहीं हैं।  यदि ये गंभीर होते तो आज कम से कम पूरे भारत में बहुजन समाज का 20 मीडिया हॉउस होना चाहिए था।



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